वर्मीकम्पोस्ट क्या है? Vermicompost meaning in hindi
वर्मीकम्पोस्ट जिसे 'केचुआ खाद' भी कहते हैं, यह उच्च किस्म के केचुओं द्वारा गोबर एवं भोजन के कचरे आदि को विघटित करके बनाई जाती है। यह पूर्णतः जैविक खाद होती है ।
यह पूरे तरह से कार्बनयुक्त होती है और इसमें NPK की मात्रा भरपूर होती है।
इसमें 2.5 से 3% नाइट्रोजन, 1.5 से 2% सल्फर तथा 1.5 से 2% पोटाश पाया जाता है।
इसमें कई प्रकार के माइक्रो नुट्रिएंट्स भी पाए जाते है जिसके कारण जैविक खाद विभिन्न प्रकार की फसलों, सब्जियों और पौधों के लिए सम्पूर्ण भोजन का काम करती है ।
जिन जगहों पर पानी की कमी है वहां फसलों की पिलाई (watering) ये कम कर देती है । यानी इसके उपयोग के बाद हमें कम पानी देने की आवश्यकता पड़ती है।
जैविक खाद में एक पैराट्रोपिक झिल्ली होती है जिससे इसमें पानी रोकने के क्षमता बहुत ज़्यादा होती है जिससे ये कम पानी में भी फसल को ज़्यादा अच्छे रिजल्ट्स देती है और इसके
रासायनिक खाद और पेस्टीसाइड्स के उपयोग से जो ज़मीन का कार्बन जो ख़त्म या कम हो चुका है वो बहुत जल्दी जमीन को मिलने लग जाता है।
केंचुआ खाद के फायदे | वर्मीकम्पोस्ट के लाभ
• यह भूमि की उर्वरकता (fertility), वातायनता (ventilation) को तो बढ़ाता ही हैं, साथ ही भूमि की जल सोखने की क्षमता में भी वृद्धि करता हैं। इसके प्रयोग से सिंचाई की लागत में कमी आती हैं।
• वर्मी कम्पोस्ट वाली भूमि में खरपतवार कम उगते हैं तथा पौधों में रोग कम लगते हैं।
• वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने वाले खेतों में अलग अलग फसलों के उत्पादन में 25-300% तक की वृद्धि हो सकती हैं।
• मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती हैं।
वर्मी कम्पोस्ट युक्त मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश का अनुपात 5:8:11 होता हैं अतः फसलों को पर्याप्त पोषक तत्व सरलता से उपलब्ध हो जाते हैं।
• केचुओं के मल में पेरीट्रापिक झिल्ली होती हैं, जो जमीन से धूल कणों को चिपकाकर जमीन का वाष्पीकरण होने से रोकती हैं।
• केचुओं के शरीर का 85% भाग पानी से बना होता हैं इसलिए सूखे की स्थिति में भी ये अपने शरीर के पानी के कम होने के बावजूद जीवित रह सकते हैं तथा मरने के बाद भूमि को नाइट्रोजन प्रदान करते हैं।
• वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि करता हैं तथा भूमि में जैविक क्रियाओं को निरंतरता प्रदान करता हैं। इसका प्रयोग करने से भूमि उपजाऊ एवं भुरभुरी बनती हैं।
• यह खेत में दीमक एवं अन्य हानिकारक कीटों को नष्ट कर देता हैं। इससे कीटनाशक की लागत में कमी आती हैं।
• इसके उपयोग के बाद 2-3 फसलों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनी रहती हैं।
• मिट्टी में केचुओं की सक्रियता के कारण पौधों की जड़ों के लिए उचित वातावरण बना रहता हैं, जिससे उनका सही विकास होता हैं।
• यह कचरा, गोबर तथा फसल अवशेषों से तैयार किया जाता हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता हैं।
• लगातार रासायनिक खादों के प्रयोग से कम होती जा रही मिट्टी की उर्वरकता को इसके उपयोग से बढ़ाया जा सकता हैं।
• इसके प्रयोग से फल, सब्जी, अनाज की गुणवत्ता में सुधार आता हैं, जिससे किसान को उपज का बेहतर मूल्य मिलता हैं।
• केंचुए में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव मिट्टी का pH संतुलित करते हैं।
• उपभोक्ताओं को पौष्टिक भोजन की प्राप्ति होती हैं।
• ग्रामीण क्षेत्रों में इसके उपयोग से रोजगार की संभावनाएं उपलब्ध हो जाती हैं।
वर्मी कम्पोस्ट क्या है? इसके क्या फायदे हैं, और इसे कैसे इस्तेमाल करते हैं जानने के लिए नीचे वीडियो देखिए ⤵️


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