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कभी सूखे से जूझ रहा था बुंदेलखंड का किसान, आज औषधीय खेती में सबसे आगे

Medicinal plantation in UP: Bundelkhand at the forefront of medicinal farming in UP

उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार औषधीय पौधों की खेती (Medicinal plantation) को बढ़ावा दे रही है। गांवों में पौधशालाएं स्थापित की जा रही हैं, प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जड़ी-बूटियों का रोपण जोरों पर है।

बुंदेलखंड क्षेत्र के किसान विशेष रूप से आर्थिक लाभ के साथ-साथ इसके स्वास्थ्य लाभ के लिए औषधीय पौधों की खेती कर रहे हैं। यह क्षेत्र के किसानों के बीच नया चलन है।

किसान तुलसी, एलोवेरा, अश्वगंधा, ब्राह्मी, सतावर, वाच, आर्टेमिसिया, कौंच, कालमेघ और सर्पगंधा उगाने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

Aloe Vera farming

बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग की राष्ट्रीय औषधीय पादप मिशन योजना ( National Medicinal Plants Mission) ने हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में औषधीय पौधों की खेती को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कोरोनावायरस (कोविड -19) महामारी के बीच औषधीय फसलों की मांग भी काफी बढ़ गई है।

 राज्य आयुष मिशन के नोडल अधिकारी एवं उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ वी बी द्विवेदी ने रविवार को यहां कहा कि विभाग सरकार की मंशा के अनुरूप औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के साथ ही देवीपाटन मंडल के साथ-साथ लखनऊ और मेरठ अंचल के किसानों ने भी औषधीय पौधों की खेती शुरू कर दी है।

उन्होंने कहा कि मिर्जापुर और जालौन के किसानों के हर्बल उत्पाद विदेशों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। इस बीच गोरखपुर में बड़ी संख्या में किसान सतवारी की खेती करने लगे हैं।

 इस योजना ने किसानों को उनकी आय दोगुनी करके आत्मनिर्भर बनने में मदद की है, और उन्हें स्वस्थ रहने में भी मदद कर रही है।

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